जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित वर्ष 2026 के बोर्ड परीक्षा परिणामों ने जांजगीर-चांपा जिले की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कभी शिक्षा के क्षेत्र में संतुलित प्रदर्शन करने वाला यह जिला अब लगातार पिछड़ता नजर आ रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, कक्षा 10वीं और 12वीं—दोनों ही परीक्षाओं में जिले की रैंकिंग राज्य के निचले पायदानों में दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय बन गया है।
आंकड़ों में हकीकत
जारी परिणामों के मुताबिक—
- कक्षा 10वीं में जांजगीर-चांपा जिला 32वें स्थान पर रहा, जहां कुल प्रतिशत लगभग 59.90% दर्ज किया गया।
- वहीं कक्षा 12वीं में भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं रही और जिला 32वें स्थान पर ही रहा, जहां पास प्रतिशत करीब 65.73% रहा।

यह प्रदर्शन दर्शाता है कि जिले की शिक्षा गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही है, जबकि राज्य के अन्य जिले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
क्या हैं गिरावट के प्रमुख कारण?
1. गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की व्यस्तता
जिले के कई स्कूलों में शिक्षक नियमित पढ़ाई के बजाय विभिन्न सरकारी और प्रशासनिक कार्यों में लगे रहते हैं। चुनाव ड्यूटी, सर्वे, योजनाओं का क्रियान्वयन—इन सब के चलते कक्षाएं प्रभावित होती हैं और छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है।
2. शिक्षा व्यवस्था में बढ़ता हस्तक्षेप
स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों और राजनीति का हस्तक्षेप भी शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। इससे स्कूलों के संचालन और अनुशासन पर असर पड़ता है।
3. स्कूलों में अनुशासन और मॉनिटरिंग की कमी
कई स्कूलों में नियमित कक्षाएं नहीं लग पातीं। निरीक्षण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था कमजोर होने के कारण शिक्षक और स्टाफ पर जवाबदेही का दबाव कम हो गया है।
4. अभिभावकों की सीमित भागीदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कई मामलों में बच्चों की पढ़ाई को लेकर घर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता, जिससे छात्रों की तैयारी कमजोर रह जाती है।
5. संसाधनों और गुणवत्ता में असमानता
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्कूलों के बीच संसाधनों और शिक्षण गुणवत्ता में अंतर भी एक बड़ी चुनौती है।
केवल शिक्षक जिम्मेदार नहीं
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या बहुआयामी है। केवल शिक्षकों को दोष देना उचित नहीं होगा। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षक, अभिभावक, प्रशासन और जनप्रतिनिधि—सभी की साझा जिम्मेदारी बनती है।
जवाबदेही तय करना जरूरी
हालांकि यह भी स्पष्ट है कि शिक्षक शिक्षा प्रणाली की रीढ़ होते हैं। उन्हें मिलने वाला वेतन और जिम्मेदारी, दोनों ही उन्हें बच्चों के भविष्य के प्रति जवाबदेह बनाते हैं। ऐसे में उनकी उपस्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता और प्रदर्शन की नियमित समीक्षा आवश्यक है।
अब क्या हो समाधान?
- स्कूलों में नियमित कक्षाएं सुनिश्चित की जाएं
- शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से सीमित किया जाए
- निरीक्षण और मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत बनाया जाए
- अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जाए
- कमजोर छात्रों के लिए विशेष कोचिंग और मार्गदर्शन की व्यवस्था हो
- शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप कम किया जाए
निष्कर्ष
जांजगीर-चांपा में गिरता शिक्षा स्तर केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यदि समय रहते इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह गिरावट और गहरी हो सकती है। अब जरूरत है सामूहिक प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति की, ताकि जिले की शिक्षा व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाया जा सके।


