अमन छत्तीसगढ़ न्यूज़
जांजगीर-चांपा। सिख धर्म के नवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी, जिन्हें विश्व इतिहास में “हिंद की चादर” के रूप में जाना जाता है, की 350वीं शहादत दिवस*के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, चाम्पा में श्रद्धा, भक्ति और सेवा भावना से ओतप्रोत भव्य विशेष दीवान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पाठ साहिब, कीर्तन और अरदास के साथ हुई। गुरुद्वारे में शहर भर से श्रद्धालु संगत ने पहुंचकर गुरु साहिब के बलिदान को नमन किया। रागी जत्थों द्वारा गुरु महिमा व इतिहास से जुड़े सबद कीर्तन प्रस्तुत किए गए, जिसने भावपूर्ण वातावरण बना दिया।

गुरु तेग बहादुर साहिब: धर्म की रक्षा का प्रतीक
गुरु तेग बहादुर साहिब जी का जीवन त्याग, साहस और मानवता की रक्षा का महान उदाहरण है।
17वीं शताब्दी में जब जबरन धर्म परिवर्तन और अत्याचार आम हो रहे थे, तब गुरु तेग बहादुर जी ने:
धर्म और मानवीय अधिकारों की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर किए
निःस्वार्थ रूप से कमजोरों और अत्याचारग्रस्त लोगों की आवाज बने
“सबका अधिकार – धर्म की स्वतंत्रता” का संदेश दिया
गुरु साहिब ने न केवल सिख धर्म बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज को यह प्रेरणा दी कि
धर्म व्यक्ति का अधिकार है, जिसे कोई भी शक्ति छीन नहीं सकती।
मंच से दिया गया संदेश
दीवान में ज्ञानीजनों ने कहा कि आज की पीढ़ी को गुरु तेग बहादुर साहिब के आदर्शों को समझने और जीवन में उतारने की आवश्यकता है। गुरु साहिब ने सिखाया:
सत्य पर अडिग रहो
कमज़ोर और पीड़ित की रक्षा करो
अन्याय के विरुद्ध खड़े रहो, चाहे कीमत कितना भी क्यों न चुकानी पड़े

ऐतिहासिक संदेश
गुरु तेग बहादुर जी की शहादत केवल सिख धर्म का नहीं, बल्कि पूरे भारत और मानवता का स्वर्ण अध्याय है। वह शहादत जिसने बताया कि—
“धर्म की रक्षा के लिए बलिदान देना महानतम कर्म है।”
यह कार्यक्रम गुरु साहिब के अमर संदेशों को संजोने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने की भावनापूर्ण पहल रहा, जिसमें चाम्पा की संगत ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर शहादत दिवस को अविस्मरणीय बना दिया।



