“बार-बार समस्याओं की जानकारी देने के बावजूद समाधान नहीं, अधिकारी जनता और जनप्रतिनिधियों की बात तक नहीं सुनते तो जवाबदेही किसकी?”
दंतेवाड़ा जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर आईटी सेल कांग्रेस जिला सचिव एवं मीडिया प्रभारी, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी गीदम ऋषभ सुराना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न मदों से करोड़ों रुपये का फंड उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद कई स्कूलों और छात्रावासों की जमीनी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
ऋषभ सुराना ने कहा कि सरकार और विभाग शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की बात करते हैं, लेकिन यदि इतनी बड़ी राशि उपलब्ध हो रही है तो उसका असर स्कूलों, छात्रावासों और बच्चों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर फंड उपलब्ध होने के बावजूद बच्चों को जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान क्यों होना पड़ रहा है?
बार-बार जानकारी देने के बाद भी समस्याएं जस की तस
ऋषभ सुराना के मुताबिक क्षेत्र में स्कूलों और छात्रावासों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों को बार-बार दी गई है। उनका कहना है कि समस्या सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी को उसका संज्ञान लेकर वास्तविक स्थिति की जानकारी लेना और समाधान की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी स्कूल, छात्रावास या बच्चे से जुड़ी समस्या की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को लगातार दी जा रही है और इसके बावजूद उसका निराकरण नहीं हो रहा है, तो आखिर इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी?
“समस्या बताने के बाद भी समाधान नहीं होगा तो जनता किसके पास जाएगी?”
ऋषभ सुराना ने जिला शिक्षा अधिकारी एस.वी. प्रमोद ठाकुर की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े मामलों को लेकर संपर्क करने पर फोन नहीं उठाने अथवा उचित जवाब नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी जिले की शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण अधिकारी हैं। हजारों बच्चे स्कूलों और छात्रावासों से जुड़े हुए हैं। किसी भी समय किसी विद्यालय या छात्रावास में गंभीर अथवा आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में यदि संबंधित अधिकारी से संपर्क ही नहीं हो पाए तो समस्या का समाधान कैसे होगा?
कार्यालय में बैठकर नहीं, स्कूल और छात्रावास जाकर देखें स्थिति
ऋषभ सुराना ने अधिकारियों से स्कूलों और छात्रावासों का जमीनी निरीक्षण करने की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति फाइलों में नहीं, बल्कि स्कूल और छात्रावासों में जाकर ही समझी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि वे स्वयं क्षेत्र में जाकर बच्चों से बातचीत करते हैं और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करते हैं। बच्चों से बातचीत के दौरान शिक्षा, सुविधाओं और छात्रावासों से जुड़ी कई समस्याएं सामने आती हैं।
उन्होंने कहा, “बच्चों के भविष्य का फैसला सिर्फ फाइलों में नहीं हो सकता। अधिकारी स्कूल और छात्रावासों में जाकर बच्चों से बात करें, तभी वास्तविक स्थिति सामने आएगी।”
करोड़ों के फंड के उपयोग में पारदर्शिता की मांग
शिक्षा के नाम पर आने वाले करोड़ों रुपये के फंड को लेकर भी ऋषभ सुराना ने पारदर्शिता की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि शिक्षा के लिए कितनी राशि किस मद में प्राप्त हुई और उसका कितना उपयोग किया गया।
उन्होंने स्कूलों एवं छात्रावासों में उपलब्ध कराए गए फंड, उससे किए गए कार्यों और बच्चों को मिली सुविधाओं की पारदर्शी समीक्षा कराने की मांग की है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित मामलों की जांच कराने की बात भी कही है।
उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बच्चों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है, तो यह गंभीर विषय है।
“बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं होगा”
ऋषभ सुराना ने कहा कि शिक्षा कोई छोटा मुद्दा नहीं है। आज के बच्चे ही भविष्य में जिले और प्रदेश की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसलिए स्कूलों और छात्रावासों से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए।
उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की कि:
– जिले के स्कूलों एवं छात्रावासों का जमीनी निरीक्षण कराया जाए।
– बच्चों एवं विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए।
– लंबे समय से लंबित समस्याओं का समयबद्ध निराकरण किया जाए।
– शिक्षा के लिए आने वाले फंड के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
– अधिकारियों की कार्यप्रणाली एवं जवाबदेही की समीक्षा की जाए।
– जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों द्वारा दी जाने वाली शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लिया जाए।
“अब चुप बैठने का सवाल ही नहीं”
ऋषभ सुराना ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि बार-बार समस्याओं की जानकारी देने के बावजूद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ और बच्चों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इस मुद्दे को लेकर आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “हमने पहले समस्या बताई है, समाधान के लिए समय दिया है। लेकिन अगर इसी तरह चलता रहा तो जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा। बच्चों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर अब चुप बैठने का सवाल ही नहीं है।”
उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित एवं बेहतर छात्रावास और आवश्यक सुविधाएं दिलाने की लड़ाई है।
“करोड़ों का फंड आए और बच्चे सुविधाओं के लिए तरसें—यह व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी।”
— ऋषभ सुराना
आईटी सेल जिला सचिव, जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा
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