रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के चौथे दिन सदन की कार्यवाही हंगामेदार रही। प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश की जेलों में हुई मौतों का मुद्दा जोर-शोर से उठा, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। जवाबों से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया।
जेलों में मौत का मुद्दा गरमाया
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में प्रदेश की जेलों में हो रही मौतों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि पिछले एक वर्ष में कितने बंदियों की मौत हुई और जेलों की वर्तमान स्थिति क्या है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की जेलों में क्षमता से 150 प्रतिशत अधिक कैदी बंद हैं, जिससे व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने हत्या, लूट और फिरौती जैसे अपराधों में 35 प्रतिशत वृद्धि का मुद्दा भी उठाया और कानून-व्यवस्था पर सरकार से जवाब मांगा।
इस पर उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच 66 बंदियों की मौत हुई है। इनमें से 18 मामलों में मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 48 प्रकरणों में जांच प्रक्रिया जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी कस्टोडियल डेथ में नियमानुसार मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य रूप से कराई जाती है।
जीवन ठाकुर की मौत पर तीखी बहस
सदन में जीवन ठाकुर की मौत का मामला भी जोरदार ढंग से उठा। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि जीवन ठाकुर को फर्जी मामले में फंसाया गया, उन्हें और उनके पुत्र को जेल में बंद किया गया तथा परिजनों से मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टर की सलाह के बावजूद उन्हें समय पर अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया।
इस पर विजय शर्मा ने जवाब दिया कि बंदी द्वारा जेल में निर्धारित परहेज का पालन नहीं किया जा रहा था, जिससे उनकी शुगर स्तर बढ़ता था। जेल प्रशासन द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और आवश्यक दवाएं दी गईं। परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें रायपुर लाया गया था। मंत्री ने कहा कि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई और सभी तथ्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि विधायकों को जीवन ठाकुर से मिलने नहीं दिया गया और पिता-पुत्र को अलग रखा गया। उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जानकारी सदन में देने की मांग की।
विपक्ष का हंगामा और वॉकआउट
विपक्षी विधायकों ने जीवन ठाकुर की मौत को “सरकारी हत्या” करार देते हुए सदन की समिति से जांच कराने की मांग की। इस मांग को लेकर सदन में जोरदार नारेबाजी हुई। जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने अंततः बहिर्गमन कर दिया।
इस दौरान सत्ता पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि यदि मृतक कोई आम व्यक्ति भी होता तो भी वही प्रक्रिया अपनाई जाती। सरकार ने दोहराया कि सभी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
नक्सली पुनर्वास नीति पर भी चर्चा
सदन में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे भी उठे। कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने नक्सली पुनर्वास नीति और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को दी जाने वाली राशि को लेकर सवाल किया।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि वर्ष 2023-24 के दौरान 1496 इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन पर कुल 49.50 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, जिसका भुगतान नियमानुसार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
बजट चर्चा की शुरुआत
प्रश्नकाल के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मंत्री केदार कश्यप और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विभिन्न पत्र सदन के पटल पर रखे। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा की औपचारिक शुरुआत हुई।
सत्र के चौथे दिन की कार्यवाही ने स्पष्ट कर दिया कि बजट के साथ-साथ कानून-व्यवस्था, जेल प्रशासन और नक्सल नीति जैसे मुद्दे भी राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रहेंगे। आने वाले दिनों में इन विषयों पर सदन में और तीखी चर्चा होने के संकेत मिल रहे हैं।


