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चांपा (छत्तीसगढ़) | चांपा शहर में सिख समुदाय द्वारा सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज का प्रकाश उत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। यह पावन आयोजन गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, चांपा में संपन्न हुआ, जहां सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
गुरुद्वारे को भव्य रूप से सजाया गया था। गुरु ग्रंथ साहिब जी को सुसज्जित पालकी में विराजमान किया गया, जिसे फूलों और आकर्षक सजावट से सजाया गया था। पूरे गुरुद्वारा परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और “वाहेगुरु” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।

कार्यक्रम की शुरुआत शब्द-कीर्तन से हुई। रागी जत्थे द्वारा गुरु महाराज की शिक्षाओं और बलिदान को समर्पित कीर्तन प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। इसके पश्चात सामूहिक रूप से अरदास की गई, जिसमें देश, प्रदेश और समाज में शांति, भाईचारे और समृद्धि की कामना की गई।
कीर्तन और अरदास के बाद गुरु का अटूट लंगर आयोजित किया गया। लंगर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। लंगर सेवा में सिख समुदाय के साथ-साथ अन्य समाज के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने सेवा भाव के साथ भोजन परोसने से लेकर साफ-सफाई तक की जिम्मेदारी निभाई, जो सिख धर्म की सेवा और समानता की परंपरा को दर्शाता है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने न केवल सिख धर्म को संगठित किया, बल्कि अन्याय, अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा दी। खालसा पंथ की स्थापना कर उन्होंने समाज को साहस, आत्मसम्मान और बलिदान का मार्ग दिखाया। गुरु महाराज का जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं और सेवदारों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ। चांपा शहर में यह आयोजन आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का सशक्त उदाहरण बना ।



