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Tuesday, April 14, 2026

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गरबा नाइट 3.0 में सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन की धज्जियां – प्रशासन बना मूकदर्शक, बजरंग दल पहुचे एसपी ऑफिस

अमन छत्तीसगढ़ न्यूज़

गरबा नाइट 3.0 में सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन की धज्जियां – प्रशासन बना मूकदर्शक

जांजगीर-चांपा हाई स्कूल मैदान में आयोजित ग्रैंड गरबा नाइट 3.0 में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और कलेक्टर के निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। तय समय रात 10 बजे के बाद भी तेज आवाज में डीजे बजता रहा, लेकिन प्रशासन तमाशबीन बना रहा।


सेलिब्रिटी अदा शर्मा के शामिल होने से कार्यक्रम में भीड़ उमड़ी, मगर उनकी लेट एंट्री ने कार्यक्रम को देर रात तक खींच दिया। डीजे रात 11 बजे तक बजता रहा, जबकि जिला कलेक्टर जन्मेजय महोबे और पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने दोपहर निरीक्षण कर साफ हिदायत दी थी कि रात 10 बजे के बाद कार्यक्रम बंद होना चाहिए।

मौके पर मौजूद एसडीएम और तहसीलदार खुद डीजे बंद कराने में नाकाम रहे। जब पत्रकारों ने सवाल पूछे तो एसडीएम कैमरे से मुंह छिपाकर वहां से भाग खड़े हुए।

आम लोगों की शादी-ब्याह में रात 10 बजे के बाद डीजे बजाने पर पुलिस जब्ती कर कार्रवाई करती है, लेकिन गरबा नाइट में पुलिस भी बेबस और मौन दिखाई दी।

नगर पालिका जांजगीर ने हाई स्कूल मैदान किराए पर दिया, लेकिन सीएमओ को यह तक नहीं पता कि आयोजन की अनुमति किन नियमों पर दी गई। फोन पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा – “कल ऑफिस आकर फाइल देख लीजिए।” यह प्रशासन की कार्यशैली और गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह कि कृषि विभाग के 2 सरकारी कर्मचारी आयोजन में मुख्य भूमिका निभाते नजर आए। कार्यक्रम की शुरुआत फूहड़ गानों और अश्लीलता से हुई, जिस पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है।

बजरंग दल ने पहले ही ज्ञापन देकर चेतावनी दी थी, लेकिन वह भी बेअसर साबित हुई। वहीं सांसद, पूर्व विधायक, नगरपालिका अध्यक्ष और कई जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने आयोजकों को और बल दिया।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों को अपने परिवार के पास लेने के लिए आयोजकों से गुहार करनी पड़ी, जिससे सवाल उठता है कि क्या प्रशासन जनहित से ऊपर निजी हितों में फंस गया था?

ग्रैंड गरबा नाइट 3.0 ने यह साबित कर दिया कि जिले में कानून सिर्फ आम जनता के लिए है। जहां एक ओर आम नागरिक 10 बजे बाद डीजे बजाने पर पुलिसिया कार्रवाई झेलते हैं, वहीं सत्ता-सरंक्षण में हुए इस आयोजन में नियमों को ताक पर रख दिया गया। अब देखना होगा कि क्या प्रशासन इस पूरे मामले पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या यह सिर्फ एक और “गाइडलाइन की बली” साबित होगी।

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