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Sunday, February 8, 2026

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CG Liquor Scam: चैतन्य बघेल की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार, टली सुनवाई

CG Liquor Scam: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में फंसे पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है. इसके खिलाफ सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई टल गई है.

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 सुप्रीम कोर्ट

CG Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला केस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य हाल ही में जेल से बाहर आए हैं. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए, जिसे लेकर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. सुप्रीम कोर्ट ने आज छत्तीसगढ़ सरकार की उस अपील पर सुनवाई स्थगित कर दी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को कथित शराब घोटाले से जुड़े मामलों में दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी.

जानें पूरा मामला

यह पूरा मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था. राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने दलील दी कि चैतन्य बघेल इस बहुचर्चित और सनसनीखेज शराब घोटाले में केवल एक औपचारिक आरोपी नहीं, बल्कि प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल थे. उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता और प्रभाव को देखते हुए जमानत आदेश पर पुनर्विचार आवश्यक है.

वहीं, चैतन्य बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि इस मामले की जांच दो वर्षों से अधिक समय से चल रही है और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सभी तथ्यों, साक्ष्यों और कानून के स्थापित सिद्धांतों पर विचार करने के बाद जमानत प्रदान की है.

टली सुनवाई

सुनवाई के दौरान पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल सुनवाई स्थगित करने का निर्णय लिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की एकल पीठ न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा ने 2 जनवरी 2026 को चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज दो अलग-अलग मामलों में जमानत दी थी. ईडी मामले में हाई कोर्ट ने कहा था कि चैतन्य की कथित भूमिका अन्य प्रमुख आरोपियों की तुलना में कम है, जिन्हें पहले ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है. ऐसे में समानता के सिद्धांत के तहत जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता. अदालत ने यह भी माना कि जांच मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है और साक्ष्यों की सत्यता का अंतिम परीक्षण मुकदमे के दौरान किया जाएगा. वहीं, एसीबी/ईओडब्ल्यू मामले में हाई कोर्ट ने जांच में लापरवाही को गंभीर कानून उल्लंघन करार दिया था. ईडी के अनुसार, यह कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ था.

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