खड़गे और राहुल गांधी की मौजूदगी में 8 राज्यों के 286 जिलाध्यक्षों की बैठक, 10 दिन के प्रशिक्षण और ग्रीन-येलो-रेड मूल्यांकन मॉडल पर जोर
बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और आगामी चुनावों की रणनीति तैयार करना था। कार्यक्रम के तहत एक दिन का प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पार्टी की कार्यप्रणाली, संगठन विस्तार और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में जिलाध्यक्षों को 10 दिन का विस्तृत प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे संगठनात्मक ढांचा मजबूत हो सके।
31 मार्च से पहले होगा कार्यकारिणी गठन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पार्टी संगठन को सक्रिय और मजबूत बनाने के लिए 31 मार्च से पहले ब्लॉक, जिला और प्रदेश कार्यकारिणी का गठन कर लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिलाध्यक्षों को विशेष टास्क दिए जाएंगे और उनके काम का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए पार्टी ने ग्रीन, येलो और रेड कैटेगरी का मॉडल तैयार किया है।
- ग्रीन कैटेगरी: बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलाध्यक्ष
- येलो कैटेगरी: औसत प्रदर्शन वाले
- रेड कैटेगरी: कमजोर प्रदर्शन करने वाले
बैज ने कहा कि ग्रीन कैटेगरी में आने वाले कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी के दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे, जबकि रेड जोन में आने वालों की परफॉर्मेंस की समीक्षा की जाएगी।
चैतन्य बघेल-खड़गे मुलाकात पर प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात को लेकर भाजपा द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर दीपक बैज ने पलटवार किया।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सौजन्य मुलाकात थी। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि “काजल की कोठरी में बैठे लोग दूसरों को दागी कह रहे हैं। भाजपा में हरिश्चंद्र दीया लेकर ढूंढने पर भी नहीं मिलेंगे।”
बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा के 15 साल के शासन और मौजूदा कार्यकाल में भी भ्रष्टाचार हुआ है, ऐसे में कांग्रेस पर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने सलीम राज और पुरंदर मिश्रा को भाजपा का मोहरा बताया।
नक्सल क्षेत्रों में विधायकों के दौरे पर सवाल
नक्सल प्रभावित इलाकों में विधायकों के दौरे पर रोक को लेकर दीपक बैज ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय नक्सल क्षेत्रों में भी जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा के साथ दौरे की अनुमति थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ का दावा कर रही है, तो फिर विधायकों को जनता से मिलने से क्यों रोका जा रहा है। बैज ने कहा कि “एक तरफ नक्सलमुक्त का दावा, दूसरी तरफ रोक—इससे साफ है कि दाल में कुछ तो काला है।”
असम सीएम के मानहानि दावे पर भी दिया बयान
असम के मुख्यमंत्री द्वारा मानहानि का दावा करने पर दीपक बैज ने कहा कि ऐसे दावों से सच्चाई नहीं छिप सकती। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि मामले की जांच संसद की JPC कमेटी से कराई जानी चाहिए, ताकि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि मानहानि के नोटिस लोगों को डराने के लिए दिए जाते हैं, इससे कोई पाक-साफ साबित नहीं हो सकता।
दिल्ली में हुई कांग्रेस की इस अहम बैठक को आगामी चुनावों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठनात्मक मजबूती, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यकारिणी गठन की समयसीमा तय होने से छत्तीसगढ़ कांग्रेस में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


