
भारत में होटल, रेस्टोरेंट और कैफे केवल खाने-पीने की जगह नहीं हैं, बल्कि यह लाखों लोगों को रोजगार और स्किल देने वाली एक बड़ी इंडस्ट्री बन चुकी है। इस सेक्टर से जुड़े हजारों युवा ट्रेनिंग लेकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। शेफ, वेटर, मैनेजर, डिलीवरी स्टाफ, सफाई कर्मचारी, अकाउंटेंट से लेकर मार्केटिंग तक — हर क्षेत्र में रोजगार के अवसर इसी इंडस्ट्री से निकलते हैं।
इतना ही नहीं, होटल व्यवसाय से सब्जी विक्रेता, डेयरी सप्लायर, किराना व्यापारी, गैस एजेंसी, पैकेजिंग सप्लायर, फर्नीचर कारोबारी और कई छोटे-बड़े वेंडर्स का व्यापार भी चलता है। यानी यह इंडस्ट्री केवल होटल मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।
लेकिन इन सबके बावजूद होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायियों का कहना है कि सरकार और विभिन्न विभागों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि हर विभाग अलग-अलग नियमों और जांच के नाम पर परेशान करता है। कई बार रिश्वत मांगने जैसी शिकायतें भी सामने आती हैं, जिससे छोटे कारोबारियों के लिए व्यवसाय चलाना मुश्किल हो जाता है।
होटल संचालकों के मुताबिक पुलिस, प्रेस, राजनीतिक दबाव, फूड विभाग, नापतौल विभाग, श्रम विभाग, ESIC, GST, इनकम टैक्स, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और सफाई विभाग सहित कई एजेंसियों की लगातार निगरानी और कार्रवाई का डर बना रहता है। उनका कहना है कि ऐसा व्यवहार किया जाता है मानो होटल व्यवसाय में ही सबसे ज्यादा काली कमाई हो रही हो।
व्यापारियों का कहना है कि होटल चलाना जितना बाहर से आसान दिखाई देता है, वास्तव में उतना ही कठिन है। एक ओर ग्राहकों की उम्मीदों को पूरा करना पड़ता है, दूसरी ओर कर्मचारियों का प्रबंधन और सरकारी नियमों का पालन करना पड़ता है। बढ़ती महंगाई, टैक्स, ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म का भारी कमीशन और विभागीय दबाव के बीच छोटे होटल व्यवसायियों का टिके रहना चुनौती बनता जा रहा है।
होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने सरकार से मांग की है कि इस इंडस्ट्री को केवल टैक्स और कार्रवाई के नजरिए से न देखा जाए, बल्कि इसे रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले सेक्टर के रूप में सम्मान दिया जाए। उनका कहना है कि यदि सरकार सहयोगात्मक रवैया अपनाए, तो यह इंडस्ट्री लाखों और युवाओं को रोजगार देने की क्षमता रखती है।


