अमन छत्तीसगढ़ न्यूज
बिलासपुर/कटघोरा। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज का काफिला शुक्रवार को बिलासपुर-कटघोरा मार्ग पर अचानक हुए हादसे की चपेट में आ गया। सड़क पर बैठे मवेशियों के कारण काफिले में शामिल पायलटिंग गाड़ी की टक्कर हो गई। घटना के बाद गाड़ी का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि दीपक बैज सुरक्षित हैं और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
जानकारी के मुताबिक, दीपक बैज सरगुजा में कार्यक्रम समाप्त करने के बाद वापस लौट रहे थे। इसी दौरान कटघोरा-बिलासपुर सीमा क्षेत्र के आसपास चार लेन सड़क पर बड़ी संख्या में मवेशी बैठे और खड़े नजर आए। काफिला आगे बढ़ रहा था, तभी अचानक एक मवेशी सड़क पर सामने आ गया। पायलटिंग वाहन के चालक ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वाहन की टक्कर मवेशी से हो गई।
टक्कर इतनी अचानक हुई कि पायलटिंग वाहन को तत्काल ब्रेक लगाना पड़ा। इसके चलते पीछे चल रही दीपक बैज की गाड़ी भी टकराने की स्थिति में आ गई थी। हालांकि चालक ने समय रहते सूझबूझ दिखाते हुए वाहन को नियंत्रित कर लिया और एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद काफिले में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बनी, लेकिन दीपक बैज सुरक्षित रहे।
हादसे के बाद सड़क पर खुले में घूम रहे मवेशियों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खासतौर पर नेशनल हाईवे और फोरलेन जैसी तेज रफ्तार वाली सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। अचानक सामने आने वाले पशु से बचने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होने या दूसरे वाहनों से टकराने की आशंका रहती है।
दीपक बैज ने भी घटना के बाद इसी मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नेशनल हाईवे भी आवारा मवेशियों से मुक्त नहीं हैं। उनका कहना है कि सड़कों पर मवेशियों के बैठे रहने के कारण लगातार दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है और आम वाहन चालक भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
बैज ने सड़क व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि एक तरफ प्रदेश में बेहतर और आधुनिक सड़कों की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा दिखाई देता है। ऐसे में सड़क सुरक्षा को लेकर किए जा रहे इंतजामों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की व्यवस्था प्रभावी तरीके से नहीं कर पा रही है। उनके मुताबिक गौशालाओं से लेकर फोरलेन सड़कों तक व्यवस्था में गंभीर खामियां नजर आ रही हैं। उनका कहना था कि यदि सड़कों से मवेशियों को हटाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखने की व्यवस्था मजबूत हो, तो इस तरह के हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि हाईवे पर मवेशियों की मौजूदगी केवल आम वाहन चालकों के लिए ही नहीं, बल्कि वीआईपी काफिलों के लिए भी खतरा बन सकती है। पायलटिंग वाहन के सामने अचानक मवेशी आने से कुछ ही सेकंड में पूरा काफिला जोखिम में आ सकता है। इस मामले में समय रहते वाहन नियंत्रित हो जाने से स्थिति गंभीर होने से बच गई।
स्थानीय स्तर पर भी हाईवे और प्रमुख मार्गों पर मवेशियों के जमावड़े को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। सड़क पर बैठे पशु रात के समय और कम दृश्यता की स्थिति में और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं। कई बार वाहन चालक अचानक ब्रेक लगाने या दिशा बदलने के दौरान खुद भी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
दीपक बैज के काफिले के साथ हुई घटना के बाद अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि प्रशासन और संबंधित विभाग हाईवे पर मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाते हैं। घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन इस हादसे ने सड़क सुरक्षा और आवारा मवेशियों की समस्या को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और जनचर्चा के केंद्र में ला दिया है।
