छत्तीसगढ़ के सरकारी गलियारों में अब वर्क फ्रॉम होम (WFH) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर राज्य में इस व्यवस्था को लागू करने का आग्रह किया है।
फेडरेशन की प्रमुख मांगें और तर्क
कर्मचारी संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण की अपील को आधार बनाते हुए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन संकट की आशंका को देखते हुए लिखा है कि पेट्रोल-डीजल के विवेकपूर्ण उपयोग की जरूरत है। राज्य में पहले से ही ई-ऑफिस और पेपरलेस कार्यप्रणाली लागू है, जिससे अधिकांश काम ऑनलाइन किए जा सकते हैं। विशेष रूप से नया रायपुर स्थित मंत्रालय जाने वाले हजारों कर्मचारियों के आवागमन कम होने से सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव और प्रदूषण घटेगा।
देखे फेडरेशन की चिट्ठी

दिल्ली की ‘रेखा गुप्ता सरकार’ का उदाहरण
छत्तीसगढ़ में यह मांग तब उठी है जब हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम का आदेश जारी किया है। दिल्ली सरकार ने ईंधन बचाने के लिए कुछ और कड़े कदम भी उठाए हैं, ट्रैफिक जाम से बचने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के समय में परिवर्तन।जनता से सप्ताह में एक दिन निजी वाहन न चलाने की अपील। कर्मचारियों के ट्रांसपोर्ट अलाउंस में 10% की बढ़ोतरी।
क्या होगा फायदा?
अगर छत्तीसगढ़ सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो इसके तीन बड़े फायदे देखे जा रहे हैं डिजिटल माध्यमों के उपयोग से फाइलों का निपटारा तेज होगा। सरकारी और निजी वाहनों के ईंधन खर्च में भारी कमी आएगी। वाहनों का कम संचालन हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगा।
फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय या मुख्य सचिव की ओर से इस पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन कर्मचारियों की इस पहल ने एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।


