गौ संरक्षण, पंचगव्य अनुसंधान और प्रशिक्षण को मिलेगा बढ़ावा
छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल ने शुक्रवार को श्री कृष्ण गौशाला चांपा पहुंचकर प्रस्तावित गौ अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के संभावित स्थल का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने गौ सेवा, गौ संरक्षण और पंचगव्य आधारित अनुसंधान को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
चांपा में स्थापित होने वाला यह गौ अनुसंधान केंद्र गौ माता के संरक्षण, संवर्धन, चिकित्सा एवं पंचगव्य उत्पादों के वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनेगा। केंद्र में गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों के परिशोधन, औषधि निर्माण, नस्ल सुधार, गौ पालन प्रशिक्षण तथा पंचगव्य की उपयोगिता पर विस्तृत शोध किया जाएगा। इसके माध्यम से आम लोगों को गौ पालन और गौ सेवा के प्रति जागरूक करने का भी प्रयास किया जाएगा।
पंचगव्य आधारित औषधि निर्माण पर रहेगा विशेष फोकस
निरीक्षण के दौरान अध्यक्ष विशेषर पटेल ने कहा कि गौ अनुसंधान केंद्र में पंचगव्य निर्माण, आहता निर्माण और गौवंश संरक्षण के आधुनिक तरीकों पर कार्य किया जाएगा। यहां तैयार होने वाले पंचगव्य उत्पादों के माध्यम से आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक औषधियों के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही युवाओं और पशुपालकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
भाजपा नेता अखिलेश कोमल पाण्डेय की पहल लाई रंग
गौरतलब है कि गौ अनुसंधान केंद्र की स्थापना की मांग को लेकर भाजपा नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि अखिलेश कोमल पाण्डेय ने हाल ही में बिलासपुर प्रवास के दौरान विशेषर पटेल से सौजन्य भेंट कर ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद इस दिशा में तेजी से पहल शुरू हुई।
अखिलेश कोमल पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि गौशाला में शीघ्र ही नवीन भवन, शेड, बाउंड्रीवाल और सौर ऊर्जा व्यवस्था का निर्माण कराया जाएगा, जिससे गौवंश को सुरक्षित एवं संरक्षित वातावरण मिल सके। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद गौशाला में गौवंश की संख्या बढ़ाई जाएगी तथा पंचगव्य निर्माण एवं अनुसंधान गतिविधियों को गति मिलेगी।
सांसद निधि से बना था नवीन गौशाला भवन
पूर्व राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नंदकुमार साय की सांसद निधि से लगभग 10 लाख रुपये की लागत से श्री कृष्ण गौशाला चांपा में नवीन गौशाला भवन का निर्माण कराया गया था। अब गौ अनुसंधान केंद्र की स्थापना से क्षेत्र में गौ संरक्षण और जैविक अनुसंधान को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस अवसर पर पशु चिकित्सक, गौ सेवक एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे ।


