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Wednesday, April 15, 2026

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गांव-गांव बिक रही अवैध शराब ₹40 तक अतिरिक्त वसूली, कार्रवाई शून्य

अमन छत्तीसगढ़ न्यूज़

आखिर शराब दुकान के कर्मचारी दे क्यों रहे हैं शराब?

ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि गांव-गांव खुलेआम अवैध शराब बेची जा रही है और हर बोतल पर ₹30 से ₹40 तक अतिरिक्त वसूली की जा रही है। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई का न होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अवैध शराब की उपलब्धता इतनी आसानी से हो रही है कि अब यह किसी छिपे हुए कारोबार की तरह नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का रूप ले चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस शराब की बिक्री नियमों के तहत तय दुकानों से होनी चाहिए, वही शराब गांवों में अधिक कीमत पर अवैध रूप से बेची जा रही है।

सबसे बड़ा और अहम सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब आखिर आ कहां से रही है?
जब लगातार बड़ी गिनती में शराब गांवों तक पहुंच रही है, तो यह स्पष्ट संकेत देता है कि इस पूरे मामले में शराब दुकान के कर्मचारियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि
बिना कर्मचारियों की जानकारी और सहयोग के इतनी संख्या में शराब का बाहर जाना संभव नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर शराब दुकान के कर्मचारी शराब दे क्यों रहे हैं?
क्या इसके पीछे कमीशन का लालच है,
क्या किसी प्रकार का ऊपरी दबाव है,
या फिर यह पूरा मामला मिलीभगत के तहत संचालित हो रहा है?

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब बेचने वाले न केवल सरकारी दर से अधिक कीमत वसूल रहे हैं, बल्कि खुलेआम यह कह रहे हैं कि उन्हें किसी प्रकार का डर नहीं है। इससे यह संदेह और गहराता जा रहा है कि इस पूरे कारोबार को कहीं न कहीं संरक्षण प्राप्त है

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि
जब अवैध शराब की बिक्री इतनी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है,
तो संबंधित विभागों द्वारा नियमित जांच और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।
न तो प्रभावी छापेमारी हो रही है
और न ही किसी बड़े नेटवर्क का खुलासा सामने आ रहा है।

अब सवाल बिल्कुल साफ हैं—
➡️ शराब की सप्लाई का असली स्रोत क्या है?
➡️ कर्मचारियों की भूमिका कितनी गहरी है?
➡️ अवैध शराब बेचने वालों को संरक्षण कौन दे रहा है?
➡️ और आखिर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

यह मामला केवल अवैध शराब की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानून व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और आम जनता के शोषण से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो अवैध शराब का यह कारोबार और अधिक फैल सकता है।

फिलहाल, जनता जवाब चाहती है और यह देखना शेष है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर जांच शुरू कर वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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