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Wednesday, April 15, 2026

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जांजगीर-चांपा में जिला प्रशासन की बड़ी लापरवाही, टीन शेड नियम के बाद भी ‘बांस-बल्ली’ के भरोसे चल रहा पटाखा बाजार

अमन छत्तीसगढ़ न्यूज़

जांजगीर के हाई स्कूल मैदान में लगाए गए अस्थायी पटाखा स्टॉल सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए, बांस-बल्ली और कपड़े के सहारे खड़े किए गए हैं.

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में त्योहारों के मौसम में जिला प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिसने पटाखा व्यवसायियों और आम जनता की जान को सीधे खतरे में डाल दिया है. जांजगीर के हाई स्कूल मैदान में लगाए गए अस्थायी पटाखा स्टॉल सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए, बांस-बल्ली और कपड़े के सहारे खड़े किए गए हैं. यह आग की मंडी किसी भी वक्त एक बड़ी आगजनी की घटना में बदल सकती है.

नियम को रखा ताक पर बनाई बांस-बल्ली की दुकाने

पटाखा दुकानों के लिए स्पष्ट नियम है कि अस्थायी स्टॉल का निर्माण टीन शेड से किया जाना चाहिए ताकि आग लगने की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके और आग को फैलने से रोका जा सके. लेकिन जांजगीर जिला प्रशासन की देखरेख में हाई स्कूल मैदान में लगे स्टॉल बेहद ज्वलनशील बांस और कपड़े से बनाए गए हैं. जहां जरा सी चूक, एक छोटी सी चिंगारी भी पूरे बाजार को पल भर में राख में बदल सकती है.

व्यवसायी जान जोखिम में डालने को मजबूर

प्रशासन की इस घोर लापरवाही का खामियाजा पटाखा व्यवसायी भुगत रहे हैं. वे जानते हैं कि वे जानलेवा ढांचों में अपनी दुकान लगा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की अनुमति और नियमों की अनदेखी के चलते वे जान जोखिम में डालकर व्यवसाय करने को मजबूर हैं.

2022-23 में भी लगी थी बाजार में आग

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन ने पिछले वर्षों की घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया है. याद रहे, वर्ष 2022-23 में भी जांजगीर के हाई स्कूल मैदान में लगे पटाखा बाजार की दुकानों में आग लगी थी. तब एक बड़ी घटना होते-होते बची थी. उस समय भी सुरक्षा मानकों में कमी की बात सामने आई थी. इसके बावजूद, इस साल फिर से प्रशासन ने ऐसी खतरनाक व्यवस्था को मंजूरी दे दी है.

इस व्‍यवस्‍था पर बड़े सवाल उठ रहे हैं लोगों का कहना है कि क्या जिला प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? लाखों का माल और कई लोगों की जान खतरे में है. प्रशासन को तुरंत एक्शन लेते हुए इन खतरनाक स्टॉलों को हटवाकर नियमानुसार टीन शेड के स्टॉल बनवाने चाहिए, ताकि दीपावली की खुशी मातम में न बदल सकें.

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