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Tuesday, June 2, 2026

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OP Choudhary Birthday Special : चाहते तो बन सकते थे मुख्य सचिव, लेकिन चुना राजनीति का कठिन रास्ता; जानिए वित्त मंत्री ओपी चौधरी की प्रेरक कहानी




रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज जिन नेताओं का नाम सबसे प्रभावशाली और दूरदर्शी चेहरों में लिया जाता है, उनमें वित्त मंत्री ओपी चौधरी का नाम प्रमुखता से शामिल है। प्रशासनिक सेवा से राजनीति तक का उनका सफर न केवल असाधारण है, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। 2 जून 1981 को रायगढ़ जिले के खरसिया क्षेत्र के छोटे से गांव बयांग में जन्मे ओम प्रकाश चौधरी आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। यह अवसर उनके संघर्ष, उपलब्धियों और सार्वजनिक जीवन की उस यात्रा को याद करने का है जिसने उन्हें प्रदेश की राजनीति के सबसे चर्चित नेताओं में शामिल कर दिया।

आज जब वे छत्तीसगढ़ सरकार में वित्त, वाणिज्यिक कर, आवास एवं पर्यावरण, योजना तथा आर्थिक एवं सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, तब उनकी सफलता के पीछे छिपे वर्षों के संघर्ष और कठिन निर्णयों की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है।

OP Choudhary Birthday Specialछोटे गांव से देश की सबसे कठिन परीक्षा तक

ओपी चौधरी का बचपन साधारण परिवेश में बीता। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले ओपी ने शुरू से ही शिक्षा को अपनी ताकत बनाया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को कम उम्र में ही पास कर लिया।

वर्ष 2005 में वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चयनित हुए। उस समय उनकी उम्र महज 23 वर्ष थी। इतनी कम उम्र में आईएएस बनने वाले अधिकारियों में उनका नाम शामिल हुआ और वे पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गए। यह उपलब्धि किसी भी युवा के लिए सपने जैसी थी, लेकिन ओपी चौधरी की महत्वाकांक्षाएं केवल प्रशासनिक सेवा तक सीमित नहीं थीं।

  OP Choudhary Birthday Special :   प्रशासनिक सेवा में बनाई अलग पहचान

आईएएस बनने के बाद ओपी चौधरी ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। दुर्ग में एसडीएम के रूप में उन्होंने अपने प्रशासनिक कौशल का परिचय दिया। इसके बाद सरगुजा और जांजगीर-चांपा में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के रूप में कार्य किया।

बाद में उन्हें रायपुर नगर निगम आयुक्त और जनसंपर्क संचालक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। प्रशासनिक सेवा के दौरान उनका सबसे चर्चित कार्यकाल दंतेवाड़ा में रहा। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा और विकास के क्षेत्र में किए गए नवाचारों ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

दंतेवाड़ा में शिक्षा सुधार के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के कारण उन्हें प्रधानमंत्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। उस दौर में दंतेवाड़ा में शिक्षा को लेकर किए गए प्रयासों की चर्चा देशभर में हुई थी।

इसके बाद उन्होंने जांजगीर-चांपा और रायपुर जिले के कलेक्टर के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। रायपुर कलेक्टर के रूप में उनका कार्यकाल बेहद प्रभावशाली माना जाता है। जनता से सीधा संवाद, त्वरित निर्णय और विकास कार्यों की मॉनिटरिंग ने उन्हें लोकप्रिय प्रशासक बना दिया।

   OP Choudhary Birthday Special : जब सबने कहा- गलती कर रहे हैं ओपी

अगस्त 2018 में ओपी चौधरी ने ऐसा फैसला लिया जिसने पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर को चौंका दिया। उन्होंने आईएएस जैसी प्रतिष्ठित सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में आने का निर्णय लिया।

उस समय अधिकांश लोगों का मानना था कि एक सफल अधिकारी को ऐसा जोखिम नहीं लेना चाहिए। रायपुर कलेक्टर जैसी प्रतिष्ठित जिम्मेदारी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का एक साधारण कार्यकर्ता बनने का फैसला कई लोगों को समझ नहीं आया।

राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इसे बड़ा जोखिम बताया। लेकिन ओपी चौधरी अपने निर्णय को लेकर पूरी तरह स्पष्ट थे। वे मानते थे कि व्यापक स्तर पर परिवर्तन लाने के लिए राजनीति सबसे प्रभावी माध्यम है।

  OP Choudhary Birthday Special :  अमित शाह ने कहा था- मुख्य सचिव बन सकते हैं

राजनीति में आने से पहले ओपी चौधरी की मुलाकात भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से हुई थी। एक साक्षात्कार में ओपी चौधरी ने बताया था कि जब उन्होंने राजनीति में आने की इच्छा जताई तो अमित शाह ने उनसे कहा कि उनके सामने लंबा प्रशासनिक करियर है और वे चाहें तो भविष्य में मुख्य सचिव जैसे सर्वोच्च पद तक पहुंच सकते हैं।

लेकिन ओपी चौधरी का निर्णय अटल था। उन्होंने राजनीति को सेवा का बड़ा मंच मानते हुए प्रशासनिक सेवा छोड़ने का फैसला किया। उनका मानना था कि व्यवस्था में बदलाव के लिए केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि नीति निर्माण के स्तर पर भी सक्रिय भूमिका जरूरी है।

  OP Choudhary Birthday Special :   पहली चुनावी हार ने नहीं तोड़ा हौसला

2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें उनके गृह क्षेत्र खरसिया से उम्मीदवार बनाया। मुकाबला कांग्रेस के उमेश पटेल से था। चुनाव में ओपी चौधरी को हार का सामना करना पड़ा।

राजनीति में प्रवेश के तुरंत बाद मिली हार ने कई लोगों को यह कहने का अवसर दिया कि उनका फैसला गलत था। लेकिन ओपी चौधरी ने हार को अंत नहीं माना।

उन्होंने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई, लगातार जनता के बीच रहे और अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटे रहे। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।

 OP Choudhary Birthday Special : हार को जीत में बदलने की कहानी

2023 का विधानसभा चुनाव ओपी चौधरी के राजनीतिक जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। भाजपा ने उन्हें रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा।

इस बार परिणाम पूरी तरह अलग थे। ओपी चौधरी ने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की और लगभग 64 हजार से अधिक वोटों के अंतर से विधानसभा पहुंचे। यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं थी, बल्कि उन तमाम आलोचनाओं का जवाब भी थी जो 2018 की हार के बाद उठी थीं।

 OP Choudhary Birthday Special :  अमित शाह ने निभाया अपना वादाबना दिया बड़ा आदमी

2023 विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक सभा में कहा था कि यदि ओपी चौधरी चुनाव जीतते हैं तो पार्टी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देगी।

चुनाव परिणाम आने के बाद यह बात सच साबित हुई। भाजपा सरकार बनने के बाद ओपी चौधरी को प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में शामिल वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।

इसके साथ ही उन्हें वाणिज्यिक कर, आवास एवं पर्यावरण, योजना तथा आर्थिक एवं सांख्यिकी विभागों का दायित्व भी दिया गया। युवा नेतृत्व पर पार्टी के भरोसे का यह बड़ा उदाहरण माना गया।

  OP Choudhary Birthday Special : जांजगीर-चांपा के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी

वित्त मंत्री के रूप में प्रदेश की आर्थिक नीतियों का नेतृत्व करने के साथ-साथ ओपी चौधरी जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक नेतृत्व का लाभ उन्हें इस भूमिका में भी मिलता है। जिले में विकास कार्यों, अधोसंरचना परियोजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं की नियमित समीक्षा करते हुए वे सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

 OP Choudhary Birthday Special :  चाणक्य के विचारों से मिली प्रेरणा

ओपी चौधरी कई बार सार्वजनिक मंचों पर यह स्वीकार कर चुके हैं कि राजनीति में आने की प्रेरणा उन्हें चाणक्य के विचारों से मिली।

वे अक्सर चाणक्य के उस प्रसिद्ध कथन का उल्लेख करते हैं जिसमें कहा गया है कि अच्छे लोगों के राजनीति में भाग नहीं लेने का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह होता है कि बुरे लोग अच्छे लोगों पर शासन करने लगते हैं।

ओपी चौधरी का मानना है कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए अच्छे और योग्य लोगों का राजनीति में आना आवश्यक है।

पत्नी अदिति भी हैं यूपीएससी टॉपर अधिकारी

ओपी चौधरी की निजी जिंदगी भी प्रेरणादायक है। उनकी पत्नी अदिति पटेल भारतीय रेल कार्मिक सेवा (IRPS) की अधिकारी हैं।

अदिति ने अपने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास की थी। मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा दी और सफलता हासिल की। उनके जीवन की संघर्ष गाथा भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत मानी जाती है।

   OP Choudhary Birthday Special : युवा राजनीति का मजबूत चेहरा

आज ओपी चौधरी को छत्तीसगढ़ की राजनीति में युवा नेतृत्व के सबसे मजबूत चेहरों में गिना जाता है। प्रशासनिक अनुभव, विकास की समझ, आर्थिक विषयों पर पकड़ और आधुनिक सोच ने उन्हें अलग पहचान दी है।

आईएएस अधिकारी से विधायक और फिर वित्त मंत्री तक का उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए बड़े जोखिम उठाने पड़ते हैं। जिस फैसले को कभी लोग उनकी सबसे बड़ी गलती बता रहे थे, वही फैसला आज उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन चुका है।

45वें जन्मदिन पर ओपी चौधरी केवल एक मंत्री या नेता नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।

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