📍 चांपा, छत्तीसगढ़ – एक मासूम की जिंदगी खत्म हो गई… और वजह बनी BDM शासकीय अस्पताल की घोर लापरवाही। 28 जुलाई की रात को 22 महीने के आयुष देवांगन को सांप ने काटा। उसके पिता, निखिल देवांगन, तुरंत उसे लेकर BDM अस्पताल पहुंचे — लेकिन वहां मिला उन्हें सिर्फ इंतज़ार, टालमटोल और बेरुखी।
🏥 बिना इलाज लौटाया गया मासूम
आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने कहा, “डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, दवा नहीं है। किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाइए।” सोचिए, जब जीवन और मौत के बीच एक-एक सेकंड मायने रखता है, तब एक सरकारी हॉस्पिटल किसी 22 महीने के बच्चे को बाहर निकाल देता है?
🚨 स्वास्थ्य विभाग के दावों की खुली पोल
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रचार करते हैं कि “सांप काटे तो टोना-टोटका नहीं, सीधे हॉस्पिटल जाइए”, लेकिन जब आम लोग वाकई अस्पताल पहुंचते हैं, तो उनके साथ क्या सलूक होता है — आयुष की मौत इसका कड़वा उदाहरण है।
क्या अस्पताल में दवा और स्टाफ की उपलब्धता जांची जाएगी?
क्या इस घटना की जांच SIT या किसी प्रशासनिक अधिकारी से करवाई जाएगी?
✅ प्रशासन से मांग
तुरंत जांच कमेटी गठित हो
अस्पताल स्टाफ पर FIR दर्ज हो
पीड़ित परिवार को मुआवजा मिले
BDM अस्पताल में 24×7 डॉक्टर और दवा की व्यवस्था हो
आयुष की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं है — ये व्यवस्था की बेरहमी का आईना है। आज एक मासूम की जान गई, कल कोई और हो सकता है। जब तक ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं होती, BDM जैसे हॉस्पिटल मौत के दरवाज़े बने रहेंगे।
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