चांपा। मानसून की पहली तेज बारिश ने ही नगर पालिका की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने ला दी। शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर के प्रमुख भालेराव खेल मैदान और उसके आसपास का पूरा इलाका जलमग्न हो गया। मैदान के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर आसपास की सड़कें कई फीट तक पानी में डूब गईं। देखते ही देखते पूरा मैदान तालाब में तब्दील हो गया, जिससे आम लोगों, खिलाड़ियों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।


बारिश के दौरान भालेराव मैदान के सामने जलभराव इतना अधिक हो गया कि दोपहिया वाहन आधे से अधिक पानी में डूबे नजर आए। मैदान के मुख्य गेट के बाहर पानी का स्तर लगातार बढ़ता गया, जिससे लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया। कई वाहन चालकों को रास्ता बदलकर निकलना पड़ा, जबकि कुछ लोग पानी कम होने का इंतजार करते रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान भालेराव मैदान और उसके आसपास का क्षेत्र जलभराव की समस्या से जूझता है, लेकिन नगर पालिका द्वारा स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नालियों की समय पर सफाई नहीं होने और जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों और मैदान में जमा हो जाता है।
नागरिकों ने बताया कि मैदान शहर के प्रमुख खेल स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में खिलाड़ी अभ्यास करने पहुंचते हैं। लेकिन पहली ही बारिश में मैदान पूरी तरह पानी से भर जाने के कारण खिलाड़ियों की गतिविधियां प्रभावित हो गईं। यदि लगातार बारिश होती रही तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
बारिश के दौरान शहर के अन्य निचले इलाकों में भी जलभराव की शिकायतें सामने आईं। कई स्थानों पर सड़कें पानी में डूब गईं, जिससे यातायात धीमा पड़ गया। लोगों को घंटों तक पानी के बीच से होकर निकलना पड़ा।
स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका परिषद से मांग की है कि भालेराव मैदान एवं आसपास के क्षेत्रों में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए। साथ ही नालियों की नियमित सफाई, बंद पड़े ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने तथा बारिश से पहले आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं, ताकि हर वर्ष होने वाली इस समस्या से शहरवासियों को राहत मिल सके।
पहली ही बारिश में शहर के सबसे महत्वपूर्ण खेल मैदान का इस तरह पानी में डूब जाना नगर पालिका की मानसून पूर्व तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो आगामी दिनों में लगातार होने वाली बारिश के दौरान स्थिति और भी विकट हो सकती है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कितनी गंभीरता से कदम उठाते हैं या फिर हर वर्ष की तरह यह समस्या केवल शिकायतों तक ही सीमित रह जाएगी।


