
रायगढ़।
छत्तीसगढ़ भाजपा में इन दिनों अंदरूनी खींचतान के संकेत लगातार तेज़ हो रहे हैं। युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिये कैबिनेट मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता ओपी चौधरी पर अप्रत्यक्ष हमला बोल दिया है।
रवि भगत ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने सुना है कि ओपी चौधरी के पिता और दादा एक शिक्षित परिवार से थे और अधरिया समाज को रायगढ़ क्षेत्र में संपन्न माना जाता है, जिसे पूरा रायगढ़ जनता है। ऐसे में गरीबी और अभाव की कहानी, जो चौधरी के संघर्ष से जुड़ी बताई जाती है, उस पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर किसी क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत माना जाता है, तो वहां के नेताओं द्वारा लगातार “गरीबी की कथा” सुनाना वास्तविकता से मेल नहीं खाता। यह बयान सीधे-सीधे ओपी चौधरी के राजनीतिक ब्रांड और संघर्ष की छवि को चुनौती देता है।
पुराना विवाद भी ताज़ा
यह पहला मौका नहीं है जब रवि भगत के बयान सुर्खियों में आए हैं। कुछ ही दिन पहले उन्होंने DMF (District Mineral Foundation) को लेकर खुलकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
सूत्रों के मुताबिक, उस समय भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने रवि भगत को सख्त चेतावनी दी थी, लेकिन अब दोबारा इस तरह की सार्वजनिक पोस्ट ने भाजपा के भीतर असहज स्थिति पैदा कर दी है।
क्या बदले जाएंगे युवा मोर्चा अध्यक्ष?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बार-बार विवादित बयान देकर प्रदेश अध्यक्ष पार्टी अनुशासन की सीमा लांघ रहे हैं। भाजपा नेतृत्व इस बार मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
पार्टी के अंदर से मिल रही जानकारी के मुताबिक, शीर्ष स्तर पर इस बात पर मंथन शुरू हो गया है कि युवा मोर्चा में नेतृत्व परिवर्तन कर दिया जाए।
कई जानकार मानते हैं कि विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा एक बड़े संगठनात्मक पुनर्गठन की तैयारी में है और ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष बदलना भी संभव है। खासकर तब, जब पार्टी 2028 की तैयारी में एकजुटता और अनुशासन को प्राथमिकता दे रही है।
भविष्य की राजनीति पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे सार्वजनिक विवाद भाजपा की छवि को कमजोर करते हैं और विपक्ष को हमला करने का मौका देते हैं। यदि नेतृत्व ने इस पर सख्त कदम उठाया, तो यह एक संदेश भी होगा कि पार्टी अनुशासन से ऊपर कोई नहीं है।
रवि भगत का यह पोस्ट न केवल उनके और ओपी चौधरी के बीच रिश्तों की खटास को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भाजपा में आंतरिक मनमुटाव किस हद तक सतह पर आ चुका है।


