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Monday, August 10, 2026

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BREAKING: कमीशन के लालच में साइबर ठगों को दिए बैंक खाते, जांजगीर-चांपा पुलिस ने 5 आरोपियों को भेजा जेल

जांजगीर-चांपा में म्यूल अकाउंट गिरोह पर बड़ी कार्रवाई, 5 खाताधारक गिरफ्तार; 33 साइबर फ्रॉड मामलों में ₹10.18 करोड़ की ठगी


जांजगीर-चांपा साइबर थाना पुलिस ने म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 33 साइबर फ्रॉड मामलों में ₹10.18 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है।


जांजगीर-चांपा। साइबर ठगी के लिए बैंक खातों को कमीशन के लालच में उपलब्ध कराने वाले कथित म्यूल अकाउंट नेटवर्क के खिलाफ साइबर थाना जांजगीर-चांपा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले में 5 म्यूल खाता धारकों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा है।


पुलिस के अनुसार, आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों का संबंध देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 33 साइबर फ्रॉड प्रकरणों से सामने आया है। इन मामलों में कुल करीब 10 करोड़ 18 लाख 19 हजार 809 रुपये की साइबर ठगी की जानकारी मिली है। जांच में यह भी सामने आया कि इन प्रकरणों से संबंधित करीब 66 लाख 557 रुपये की राशि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए म्यूल खातों में ट्रांसफर हुई थी।
कमीशन के लालच में साइबर ठगों को दिए बैंक खाते
साइबर थाना पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने आर्थिक लाभ और कमीशन के लालच में अपने नाम से बैंक खाते खुलवाए तथा उनके साथ मोबाइल नंबर भी सक्रिय करवाए। इसके बाद इन बैंक खातों और सिम नंबरों को कथित तौर पर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया गया।


इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की जांच के आधार पर आरोपियों की भूमिका सामने आने की बात कही है।


11 राज्यों में दर्ज 33 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े खाते
पुलिस के अनुसार, समन्वय पोर्टल से प्राप्त इनपुट और बैंकिंग लेनदेन की जांच में आरोपियों के उपलब्ध कराए गए बैंक खाते देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 33 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े पाए गए।


इनमें आंध्र प्रदेश के 4, गोवा के 2, गुजरात के 5, हिमाचल प्रदेश के 2, कर्नाटक के 6, महाराष्ट्र के 3, राजस्थान के 2, तेलंगाना के 4, उत्तर प्रदेश के 2, पश्चिम बंगाल के 1 और छत्तीसगढ़ के 2 मामले शामिल हैं।
इन सभी 33 मामलों में कुल करीब ₹10.18 करोड़ की साइबर ठगी सामने आने की बात पुलिस ने कही है।


5 आरोपियों को किया गया गिरफ्तार


साइबर थाना जांजगीर-चांपा पुलिस ने मामले में इन पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है—
* सत्यनारायण आदित्य, निवासी ग्राम किकिरदा, थाना बिरा, जिला जांजगीर-चांपा।
* तुषार सिंह राठौर, निवासी ग्राम फरसवानी, थाना उरगा, जिला कोरबा।
* हरीश कुमार देवांगन, निवासी सिवनी, थाना चांपा, जिला जांजगीर-चांपा।
* ओम प्रकाश केंवट, निवासी फरसवानी, थाना उरगा, जिला कोरबा।
* मनोज कुमार मांझी, निवासी चांपा, थाना चांपा, जिला जांजगीर-चांपा।
पुलिस ने बताया कि सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।


पूछताछ में संदीप चंद्रा का नाम सामने आया
पुलिस पूछताछ में आरोपी तुषार सिंह राठौर, ओम प्रकाश केंवट और सत्यनारायण आदित्य ने कथित तौर पर बताया कि संदीप चंद्रा और उसके साथियों द्वारा कमीशन का लालच देकर बैंक खाते खुलवाए गए थे।
पुलिस के अनुसार, मोबाइल नंबर भी चालू करवाए गए और बैंक खातों को अपने उपयोग के लिए ले लिया गया। इसके बदले खाताधारकों को कमीशन के रूप में रकम मिलने की बात सामने आई है।
जांच में यह भी जानकारी मिली है कि संदीप चंद्रा वर्तमान में बिलासपुर रेंज के साइबर थाना में दर्ज एक साइबर फ्रॉड प्रकरण में केंद्रीय जेल में निरुद्ध है।


म्यूल अकाउंट क्या होता है?


म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है, जिसे कोई व्यक्ति कमीशन या आर्थिक लाभ के लालच में साइबर अपराधियों को इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध कराता है। साइबर ठगी की रकम पहले ऐसे खातों में पहुंचाई जाती है और फिर उसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है।
इस तरह रकम को कई खातों के माध्यम से घुमाया जाता है, जिससे साइबर अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अपने बैंक खाते को साइबर अपराध के लिए उपलब्ध कराना भी गंभीर अपराध है। खाताधारक की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
साइबर थाना पुलिस की आम लोगों से अपील
साइबर थाना जांजगीर-चांपा ने आम नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या किसी अन्य लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, ओटीपी, पासवर्ड या इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं।


यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस के अनुसार, ठगी की सूचना जितनी जल्दी दी जाती है, रकम को होल्ड कराने या वापस दिलाने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।


अन्य आरोपियों की तलाश जारी


साइबर थाना पुलिस के मुताबिक, मामले में आगे की विवेचना जारी है। अन्य संभावित संलिप्त आरोपियों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है और प्रकरण में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
इस पूरी कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक भास्कर शर्मा, सउनि विवेक सिंह, आरक्षक प्रदीप दुबे, चिरंजीव कुमार और साइबर थाना टीम का सराहनीय योगदान रहा।

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