छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के चांपा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले कोटाडबरी गांव के शासकीय स्कूल की हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करनी पड़ रही है। स्कूल भवन जर्जर हो चुका है, छत जगह-जगह से टूट रही है और बारिश के समय पानी सीधे कक्षा में टपकता है। इसके बावजूद मासूम बच्चे उसी हालत में फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
टपकती छत, गिरता प्लास्टर—हर दिन खतरा
स्कूल के अंदर की स्थिति देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पढ़ाई करना कितना जोखिम भरा है। छत के कई हिस्सों से प्लास्टर उखड़ चुका है और कभी भी गिर सकता है। बरसात के दौरान हालात और बिगड़ जाते हैं—कक्षाओं में पानी भर जाता है, बच्चे इधर-उधर सिमटकर बैठते हैं या फिर गलियारे में पढ़ाई करने लगते हैं। यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि सीधा खतरा है।
फर्श पर बैठकर पढ़ाई, संसाधनों की भारी कमी
स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच तक उपलब्ध नहीं हैं। बच्चे पुराने मैट या चटाई पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। कई जगह फर्श भी टूटा हुआ है। दीवारों पर लगे शैक्षणिक चार्ट नमी और सीलन के कारण खराब हो चुके हैं, जिससे पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित हो रहा है।
शौचालय-बाथरूम नहीं, छात्राओं के लिए बड़ी समस्या
सबसे गंभीर मुद्दों में से एक है—स्कूल में शौचालय और बाथरूम की व्यवस्था का न होना। छात्राओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्हें मजबूरी में खुले में जाना पड़ता है, जो न सिर्फ असुरक्षित है बल्कि स्वच्छता के लिहाज से भी खतरनाक है। इस वजह से कई अभिभावक अपनी बेटियों को नियमित स्कूल भेजने में झिझकते हैं।
स्वास्थ्य पर असर, बीमारी का खतरा
जर्जर भवन, गंदगी और पानी जमा होने की समस्या बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। मच्छरों और कीटों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है। वहीं छत से गिरता मलबा कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
शिक्षकों की मजबूरी
स्कूल में पदस्थ शिक्षक भी इस हालात से परेशान नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि वे सीमित संसाधनों में बच्चों को पढ़ाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जब मूलभूत सुविधाएं ही नहीं होंगी, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल हो जाता है। कई बार अधिकारियों को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अभिभावकों में नाराजगी
गांव के अभिभावकों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि सरकार शिक्षा के नाम पर बड़ी-बड़ी योजनाएं चलाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। वे मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द स्कूल भवन की मरम्मत कराई जाए और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
योजनाएं कागजों तक सीमित
सरकारी योजनाओं का लाभ इस स्कूल तक ठीक से नहीं पहुंच पाया है। कागजों में विकास दिखाया जाता है, लेकिन असलियत में बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
बच्चों का भविष्य खतरे में
ऐसी परिस्थितियों में पढ़ाई करने वाले बच्चों का भविष्य दांव पर है। जब माहौल ही सुरक्षित और सुविधाजनक नहीं होगा, तो पढ़ाई पर ध्यान कैसे लगेगा? कई बच्चे स्कूल छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं, जिससे शिक्षा का स्तर और गिर सकता है।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- स्कूल भवन की तुरंत मरम्मत कराई जाए
- नई कक्षाओं का निर्माण हो
- शौचालय और बाथरूम की व्यवस्था की जाए
- बच्चों के बैठने के लिए डेस्क-बेंच उपलब्ध कराए जाएं
कोटाडबरी का यह स्कूल जांजगीर-चांपा जिले में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई को उजागर करता है। एक ओर प्रदेश के मंत्री आधुनिक शिक्षा की बात कर रहे है, वहीं दूसरी ओर कई बच्चे आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।
भरत यादव और थरोज पटेल द्वारा इस समस्या की शिकायत की गई एवं मौके का वीडियो भी बनाकर सामने लाया गया।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या को कब तक नजरअंदाज करते हैं या फिर जल्द ही कोई ठोस कदम उठाकर बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा का माहौल उपलब्ध कराते हैं।


