प्रदेश अध्यक्ष पद की चर्चाओं के बीच बंद कमरे में मुलाकात… बाहर आई सिर्फ लंच की तस्वीर, अंदर क्या हुई बात?
जांजगीर। छत्तीसगढ़ भाजपा में संगठन को लेकर चर्चाओं का दौर चल ही रहा था कि जांजगीर में हुई एक मुलाकात ने सियासी तापमान बढ़ा दिया। वित्त मंत्री और जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष नारायण चंदेल के निवास पर पहुंचे।
मुलाकात हुई… लंच हुआ… बंद कमरे में चर्चा हुई।
लेकिन राजनीति में कभी-कभी मुलाकात से ज्यादा मायने उसका समय और जगह रखते हैं।
और यही वजह है कि जांजगीर की इस मुलाकात को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं।
चंदेल के घर ही क्यों?
भाजपा में संगठन से जुड़े बड़े फैसलों और बैठकों के लिए आमतौर पर पार्टी कार्यालय या निर्धारित संगठनात्मक स्थान सामने आते हैं।
लेकिन यहां तस्वीर कुछ अलग थी।
प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सीधे पहुंचे नारायण चंदेल के निजी निवास पर।
इसके बाद दोनों नेताओं के बीच चर्चा और लंच की खबर सामने आई।
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अब राजनीतिक गलियारों में सवाल है—
क्या यह सिर्फ एक सामान्य मुलाकात थी या संगठन के भीतर चल रही किसी बड़ी कवायद का हिस्सा?
फिलहाल इसका जवाब किसी के पास आधिकारिक तौर पर नहीं है।
प्रदेश अध्यक्ष की चर्चा और चंदेल का नाम
इस पूरी कहानी को और दिलचस्प बनाती है भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रही चर्चाएं।
पिछले कुछ दिनों से संगठन में संभावित बदलाव को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इन्हीं चर्चाओं में नारायण चंदेल का नाम भी सामने आता रहा है।
चंदेल भाजपा के पुराने और अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। विधानसभा उपाध्यक्ष से लेकर नेता प्रतिपक्ष तक की जिम्मेदारी संभाल चुके चंदेल की संगठन और राजनीति दोनों में लंबी पारी रही है।
ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष की चर्चाओं के बीच उन्हीं के घर जाकर ओपी चौधरी की मुलाकात को लेकर सियासी चर्चाएं होना स्वाभाविक है।
भाजपा कह रही है—कोई बदलाव नहीं… फिर क्यों बढ़ी हलचल?
दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश भाजपा पहले ही प्रदेश नेतृत्व में बदलाव को लेकर चल रही खबरों को निराधार बता चुकी है।
यानी आधिकारिक तौर पर फिलहाल कोई बदलाव सामने नहीं है।
फिर भी जांजगीर में हुई यह मुलाकात सवाल छोड़ गई है।
क्या संगठन को लेकर सिर्फ चर्चा हुई?
क्या जिले की राजनीति पर मंथन हुआ?
या फिर आने वाले समय के संगठनात्मक समीकरणों पर कोई बातचीत हुई?
इन सवालों पर अभी तस्वीर साफ नहीं है।
लंच की टेबल पर क्या हुआ फैसला?
सबसे ज्यादा उत्सुकता इसी बात को लेकर है।
बंद कमरे में हुई बातचीत का पूरा एजेंडा सामने नहीं आया है। बैठक को संगठनात्मक चर्चा और कोर कमेटी से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
यही वजह है कि इस मुलाकात को लेकर सियासी अटकलों का बाजार गर्म है।
क्योंकि राजनीति में जब संगठन की चर्चाएं चल रही हों, प्रदेश अध्यक्ष पद के नामों पर कयास लग रहे हों और उसी बीच दो बड़े नेताओं की निजी मुलाकात हो जाए…
तो सवाल उठना लाजिमी है।
अभी तस्वीर साफ नहीं… लेकिन जांजगीर की राजनीति गरमा गई
ओपी चौधरी जिले के प्रभारी मंत्री हैं, इसलिए उनका स्थानीय भाजपा नेताओं से मिलना असामान्य नहीं है।
लेकिन इस मुलाकात की टाइमिंग और राजनीतिक पृष्ठभूमि ने इसे चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल न तो भाजपा ने नारायण चंदेल के नाम को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आधिकारिक रूप से आगे किया है और न ही इस मुलाकात के पीछे किसी बड़े फैसले की पुष्टि की है।
लेकिन जांजगीर से उठी यह सियासी हलचल अब रायपुर तक चर्चा का विषय जरूर बन गई है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि यह सिर्फ एक लंच और सामान्य राजनीतिक मुलाकात साबित होती है…
या आने वाले दिनों में भाजपा संगठन से जुड़ी कोई बड़ी तस्वीर सामने आती है।
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