प्रशासन का बुलडोजर चला, अवैध निर्माण हुए जमींदोज
जांजगीर-चांपा।
जिले की वर्षों पुरानी मांग अब साकार होने की ओर है। जांजगीर-चांपा विधायक व्यास कश्यप के प्रयासों से हसदेव नदी पर नए पुल निर्माण को शासन से स्वीकृति मिल चुकी है। पुल निर्माण की प्रारंभिक प्रक्रिया के दौरान किए गए सर्वे में यह सामने आया कि प्रस्तावित स्थल पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे और निर्माण मौजूद हैं, जो विकास कार्य में सीधी बाधा बन रहे थे।
नोटिस के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण
प्रशासन द्वारा पूर्व में लछनपुर मार्ग स्थित अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि के बाद भी कब्जा नहीं हटाया गया। इसके बाद 6 फरवरी को जांजगीर तहसील के नायब तहसीलदार सृजल साहू के नेतृत्व में सेतु विभाग, नगर पालिका एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की।

भारी पुलिस बल रहा तैनात
कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस की मौजूदगी के चलते पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। प्रारंभिक विरोध के बाद प्रशासन की समझाइश पर अतिक्रमणकारियों को स्वयं सामान हटाने का अवसर दिया गया, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया।

90 प्रतिशत भूमि हुई मुक्त
सूत्रों के मुताबिक इस कार्रवाई के बाद करीब 90 प्रतिशत भूमि क्लियरेंस हो चुकी है। इससे अब हसदेव नदी पर प्रस्तावित नए पुल के निर्माण को गति मिलेगी। प्रशासन के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होते ही निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
चांपा की ओर भी होगी कार्रवाई
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि नए पुल के निर्माण को देखते हुए चांपा की ओर भी अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। पुल बनने के बाद नदी के दोनों किनारों पर आवागमन और विकास के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी। ऐसे में नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा जताई गई है।

प्रशासन का साफ संदेश
नायब तहसीलदार सृजल साहू ने स्पष्ट किया कि जिस भूमि पर कार्रवाई की गई है, वह पूरी तरह शासकीय भूमि है। पुल निर्माण को लेकर पहले ही सूचना और नोटिस दिए गए थे। नियमों का पालन नहीं करने पर मजबूरी में यह कदम उठाया गया।
बॉक्स न्यूज़
सरकारी जमीन पर कब्जा, फिर भी मुआवजे की मांग
अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अतिक्रमणकारी मुआवजे की मांग करते नजर आए, जबकि संबंधित निर्माण पूरी तरह सरकारी भूमि पर अवैध रूप से किए गए थे।
सूत्र बताते हैं कि एक ही व्यक्ति द्वारा बड़े पैमाने पर शासकीय जमीन पर निर्माण कराए गए और बाद में उन्हें किराए पर देकर मोटी कमाई की गई, जिससे शासन को राजस्व का नुकसान हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई पहले ही होनी चाहिए थी।


