अमन छत्तीसगढ़ न्यूज़
चांपा। भाजपा चांपा मंडल में पिछले दिनों मंडल अध्यक्ष संतोष थवाईत (चाबु) के खिलाफ खुलकर सामने आए असंतोष के बाद अब राजनीतिक हलकों में एक नया सवाल चर्चा का विषय बन गया है। सूत्रों के अनुसार, संगठन ने मंडल अध्यक्ष को पद पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। ऐसे में अब सभी की निगाहें उन पदाधिकारियों पर टिक गई हैं जिन्होंने अध्यक्ष के नेतृत्व में काम नहीं करने और आवश्यकता पड़ने पर सामूहिक इस्तीफा देने तक की बात कही थी।
गौरतलब है कि मंडल के कई पदाधिकारियों ने बैठक में मंडल अध्यक्ष के खिलाफ नाराजगी जताते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी। उस दौरान यह भी कहा गया था कि यदि उनकी मांग पर विचार नहीं किया गया तो वे अपने-अपने पदों से इस्तीफा देने पर मजबूर होंगे।
अब जब संगठन की ओर से मंडल अध्यक्ष को बनाए रखने का फैसला किए जाने की चर्चा सामने आ रही है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि विरोध करने वाले पदाधिकारी अपने रुख पर कायम रहते हैं या फिर संगठन के निर्णय को स्वीकार करते हुए अपने पदों पर बने रहते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह स्थिति चांपा भाजपा की आंतरिक एकजुटता की परीक्षा बन सकती है। यदि पदाधिकारी अपने पूर्व घोषणा के अनुरूप इस्तीफा देते हैं तो मंडल में संगठनात्मक बदलाव होंगे और नय समर्पित कार्यकर्ताओं को उचित स्थान मिल सकता है। वहीं यदि वे पद पर बने रहते हैं, तो विरोध और अल्टीमेटम को लेकर भी कई सवाल खड़े होंगे।
फिलहाल न तो विरोध कर रहे पदाधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है और न ही सामूहिक इस्तीफे को लेकर कोई पुष्टि हुई है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन चांपा भाजपा की आंतरिक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या विरोध करने वाले पदाधिकारी अपनी घोषणा पर अडिग रहेंगे, या संगठन के फैसले के बाद पदों पर बने रहकर नई शुरुआत करेंगे?
” इस विषय पर संगठन से नियुक्त पदाधिकारी ने बैठक लेकर दोनों पक्षों को समझाइए और समझौते का संगठन में कोई बदलाव न होने की बात कही है ।’
जिलाध्यक्ष भाजपा
श्री अंबेश जांगड़े


