रायपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, पर्युषण पर्व, गणेश चतुर्थी सहित विभिन्न पर्वों को लेकर मांस-मटन की बिक्री बंद रखने संबंधी आदेश के बाद अब होटल एवं रेस्टोरेंट संचालकों ने मीडिया में चल रही खबरों को लेकर सवाल उठाए हैं।

होटल संचालकों का कहना है कि प्रशासन द्वारा जारी मूल आदेश को देखा जाए तो उसमें पशुवध गृह एवं मांस-मटन विक्रय की दुकानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन आदेश में होटल या रेस्टोरेंट का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
इसके बावजूद कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा खबरों में “होटल-रेस्टोरेंट में भी मांसाहारी भोजन परोसना प्रतिबंधित” बताया जा रहा है। यही नहीं, ऐसी खबरों के आधार पर कुछ रिपोर्टरों के होटल-रेस्टोरेंट में पहुंचने और संचालकों से विवाद अथवा हंगामे की स्थिति पैदा होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
होटल संचालकों का सवाल—दिखाया जाए आदेश में होटल कहां लिखा है?
संचालकों का कहना है कि अगर होटल-रेस्टोरेंट में मांसाहारी भोजन परोसने पर भी प्रतिबंध है तो उसका स्पष्ट उल्लेख किस सरकारी आदेश में है?
उनका कहना है कि मीडिया में प्रकाशित खबर और सरकारी आदेश को एक जैसा मान लेना उचित नहीं है। किसी भी व्यवसायी के खिलाफ कार्रवाई स्पष्ट सरकारी आदेश और लागू नियमों के आधार पर ही होनी चाहिए।
सरकारी अधिकारी करें जांच, रिपोर्टर नहीं
होटल संचालकों का कहना है कि यदि किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ नियम उल्लंघन की शिकायत है तो नगर निगम के अधिकृत अधिकारी मौके पर जांच कर सकते हैं।
“हम सरकारी आदेश का सम्मान करते हैं। लेकिन हमें यह भी बताया जाए कि हम किस आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। यदि कोई कार्रवाई बनती है तो सक्षम अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई करें। मीडिया रिपोर्ट के आधार पर होटल में पहुंचकर कर्मचारियों या संचालकों से बहस करना उचित नहीं है।”
मीडिया रिपोर्ट और मूल आदेश में अंतर क्यों?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मूल आदेश में जो लिखा है, खबरों में उससे आगे की बात कैसे जोड़ी जा रही है?
कुछ मीडिया रिपोर्टों में होटल और रेस्टोरेंट को भी प्रतिबंध के दायरे में बताते हुए निगरानी और कार्रवाई की बात कही गई है।
वहीं होटल संचालकों का कहना है कि खबर चलाने से पहले मूल आदेश की भाषा को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि व्यापारियों और आम जनता के बीच भ्रम न रहे।
संचालकों की मांग
होटल-रेस्टोरेंट संचालकों ने प्रशासन से मांग की है कि—
प्रतिबंध किन-किन प्रतिष्ठानों पर लागू है, इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाए।
यदि होटल-रेस्टोरेंट भी दायरे में हैं तो संबंधित स्पष्ट आदेश/नियम सार्वजनिक किया जाए।
किसी भी शिकायत पर कार्रवाई केवल अधिकृत अधिकारी करें।
मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा स्वयं कार्रवाई करने अथवा विवाद की स्थिति पैदा करने से बचा जाए।
होटल संचालकों का कहना है कि धार्मिक भावनाओं और सरकारी आदेश का सम्मान सभी को करना चाहिए, लेकिन व्यापारियों को भी बिना स्पष्ट आदेश के परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
अब सवाल प्रशासन से है—क्या होटल-रेस्टोरेंट में नॉनवेज परोसने पर रोक का कोई अलग और स्पष्ट आदेश है? अगर है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए।


